IELRC.ORG - ग्लोबल वार्मिंग
 

 

 
 
 
 

 

 

ग्लोबल वार्मिंग

ग्लोबल वार्मिंग का मसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा बहसतलब मसलों में एक है। खतरनाक उत्सर्जनों को कम करने के लिए एक बाध्यकारी कानूनी व्यवस्था पर किए गए समझौते कई किस्म के विवादों से घिर चुके हैं। सबसे पहला, आईपीसीसी की सिलसिलेवार रिपोर्टों में पाई जाने वाली वैज्ञानिक सहमति ने अब तक सभी देशों द्वारा प्रभावकारी रणनीतियों के क्रियान्वयन का आधार मुहैया नहीं कराया है। दूसरे, विभिन्न देश समय के साथ ग्लोबल वार्मिंग पर कितना योगदान दे पाएंगे यह उनके मौजूदा आर्थिक विकास के स्तर पर निर्भर है। तीसरा, अधिकतर विकासशील देशों के लिए ग्लोबल वार्मिंग की तुलना में तमाम अन्य किस्म की पर्यावरणीय समस्याएं भी हैं जिन्हें तत्काल संबोधित करने की जरूरत है।

धीरे–धीरे उभर कर सामने आ रहे ग्लोबल वार्मिंग कानूनी तंत्र में इस किस्म के विरोधाभासी तथ्य देखने को मिल जाते हैं। विशेष तौर पर जलवायु परिवर्तन संधि और क्योटो संधि दोनों में ही विकसित और विकासशील देशों के लिए भिन्न वचनबद्धताएं रखी गई हैं। जलवायु परिवर्तन तंत्र का भी संज्ञान लिया जाना चाहिए क्योंकि वह बाजार आधारित क्रियान्वयन प्रणाली के इस्तेमाल का प्रयास करता है। इनमें उत्सर्जन का व्यापार और स्वच्छ विकास प्रणाली (सीडीएम) शामिल हैं जो विकसित देशों की लागत को कम करने की ओर लक्षित हैं।

ग्लोबल वार्मिंग कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन तंत्र के विकास के नीतिगत और कानूनी प्रभावों पर केन्द्रित है। यह खासकर समता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के सम्बन्धों तथा सीडीएम के संदर्भ में संधि के क्रियान्वयन में विकसित और विकासशील देशों के बीच सहयोग के अवसरों की पहचान पर केन्द्रित है।


 

जलवायु - परिवर्तन के संबंध मे चुनिंदा प्रकाशन

 

Cultural Legitimacy and Regulatory Transitions for Climate Change - A Discursive Framework

लेखक-गण: Thoko Kaime
स्रोत: Carbon and Climate Law Review (3/2011), p. 321-28.
दिनांक: 2011
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 165 [KB]
 

The Kyoto Protocol and vulnerability: human rights and equity dimensions

लेखक-गण: Philippe Cullet
स्रोत: in Stephen Humphreys ed., Human Rights and Climate Change (Cambridge: Cambridge University Press, 2010), p. 183-206.
दिनांक: 2010
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 81 [KB]
 

Forest Carbon Offsets and International Law: A Deep Equity Legal Analysis

लेखक-गण: David Takacs
स्रोत: 22 Georgetown International Environmental Law Review 521 (2010)
दिनांक: 2010
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 202 [KB]
 

The Global Warming Regime After 2012 Towards a Focus on Equity, Vulnerability and Human Rights

लेखक-गण: Philippe Cullet
स्रोत: 43/28 Economic and Political Weekly (12 July 2008), p. 109.
दिनांक: 2008
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 175 [KB]
 

Liability and Redress for Human-Induced Global Warming - Towards an International Regime

लेखक-गण: Philippe Cullet
स्रोत: 43A Stanford Journal of International Law (2007), p. 99-121.
दिनांक: 2007
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 111 [KB]
 

Equity and Flexibility Mechanisms in the Climate Change Regime: Conceptual and Pratical Issues

लेखक-गण: Philippe Cullet
स्रोत: 8/2 Review of European Community and International Environmental Law (1999), p. 168
दिनांक: 1999
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 228 [KB]
 

Joint Implementation and Forestry Projects - Conceptual and Operational Fallacies

लेखक-गण: Philippe Cullet, Patricia Kameri-Mbote
स्रोत: 74/2 International Affairs (1998), p. 393
दिनांक: 1998
प्रकाशन: academic
सारांश सम्पूर्ण मूलपाठ 153 [KB]